दुनिया कह रही है ‘नो ड्रिंक’, भारत कह रहा है ‘एक और पैग’!

Anchal Sharma
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वैश्विक शराब उद्योग की लड़खड़ाती चाल

डिजिटल डेस्क | आंचलिक ख़बरें |

पिछले चार सालों में दुनिया भर में शराब की खपत तेज़ी से घटी है। अमेरिका, यूरोप और चीन जैसे बड़े बाज़ारों में, जहां कभी जाम छलकते थे, आज शराब कंपनियों के शेयर फिसलते नज़र आ रहे हैं। Diageo, Pernod Ricard, Rémy Cointreau और Brown-Forman जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई है और पूरे शराब उद्योग की वैल्यूएशन से करीब 74 लाख करोड़ रुपये साफ हो चुके हैं।

Bloomberg रिपोर्ट: ब्रांड्स की वैल्यू आधी से भी कम

Bloomberg की रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2021 से अब तक दुनिया के 50 बड़े शराब ब्रांड्स के शेयर औसतन 46 फीसदी गिर चुके हैं, जबकि कुछ मामलों में यह गिरावट 75 फीसदी तक पहुंच गई है। इसके पीछे कारण साफ हैं—लोग सेहत को लेकर ज़्यादा जागरूक हो रहे हैं, लाइफस्टाइल बदल रही है और महंगाई ने खर्च की आदतों पर ब्रेक लगा दिया है।

शराब कंपनियां भी कर रही हैं यू-टर्न

हालात ऐसे हो गए हैं कि खुद शराब कंपनियां अब नशे से दूरी बनाने लगी हैं। Diageo ने नॉन-अल्कोहलिक ब्रांड ‘Ritual Zero Proof’ को खरीदा है, जबकि Carlsberg और Campari-Milano जैसी कंपनियां भी बिना शराब वाले ड्रिंक्स लॉन्च कर चुकी हैं। यानी ग्लोबल मार्केट अब “नो ड्रिंक, नो हैंगओवर, नो रिस्क” की राह पकड़ रहा है।

भारत की कहानी बिल्कुल उलटी

जहां दुनिया शराब छोड़ रही है, वहीं भारत में खपत लगातार बढ़ रही है। 2005 में भारत में प्रति व्यक्ति शराब की खपत 2.4 लीटर थी, जो 2016 में बढ़कर 5.7 लीटर हो गई। अनुमान है कि 2030 तक यह आंकड़ा 6.7 लीटर तक पहुंच जाएगा। आज भारत का शराब बाज़ार करीब 60 अरब डॉलर का हो चुका है।

निवेशकों के लिए ‘हाई रिटर्न’ का दौर

भारत में बढ़ती खपत का सीधा फायदा निवेशकों को मिल रहा है। पिछले चार साल में United Spirits, Radico Khaitan और Globus Spirits जैसी कंपनियों के शेयरों में 14 गुना तक की बढ़त देखी गई है। जब ग्लोबल शराब कंपनियां दबाव में हैं, तब भारतीय कंपनियां रिकॉर्ड रिटर्न दे रही हैं।

राज्यों की कमाई में भी रिकॉर्ड उछाल

शराब बिक्री से राज्यों की कमाई भी तेज़ी से बढ़ी है। सिर्फ शराब से सरकारों को करीब 19,730 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है। मध्य प्रदेश में 2021-22 में शराब की खपत 245 लाख लीटर थी, जो 2024-25 में बढ़कर 456 लाख लीटर हो गई—यानी करीब 86 फीसदी की छलांग। वहीं राजस्थान में इसी अवधि में खपत 235 लाख लीटर से बढ़कर 304 लाख लीटर हो गई, यानी लगभग 29 फीसदी की बढ़ोतरी।

भारत इतना क्यों पी रहा है?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत की करीब 60 फीसदी आबादी 35 साल से कम उम्र की है। World Health Organization (WHO) के अनुसार, भारत में महिलाओं में शराब की खपत पिछले दो दशकों में 50 फीसदी बढ़ी है। Statista और ReportLinker रिसर्च बताती हैं कि औसत आय में 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और इसी के साथ ब्रांडेड व प्रीमियम शराब की मांग हर साल करीब 18 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रही है।

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