हाई कोर्ट का सख्त आदेश: दो महीने में सर्वे, अतिक्रमण हटाने की तैयारी, रिपोर्ट सीधे अदालत को
डिजिटल डेस्क | आंचलिक ख़बरें |
- हाई कोर्ट का सख्त आदेश: दो महीने में सर्वे, अतिक्रमण हटाने की तैयारी, रिपोर्ट सीधे अदालत को
- जनहित याचिका के बाद सख्त हुआ कोर्ट
- धार्मिक स्थल की गरिमा और कानून की बराबरी पर जोर
- MCD को सौंपा गया सर्वे और कार्रवाई का जिम्मा
- फैज-ए-इलाही मॉडल को दोहराने की तैयारी
- अंतरराष्ट्रीय विरासत की छवि दांव पर
- स्थानीय लोगों में मतभेद, कोर्ट ने संतुलन पर दिया जोर
- अब सबकी निगाहें रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर
दिल्ली की 700 साल पुरानी ऐतिहासिक पहचान जामा मस्जिद एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार कारण धार्मिक गतिविधियां नहीं बल्कि अतिक्रमण पर होने वाली सख्त कार्रवाई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम को निर्देश दिया है कि जामा मस्जिद परिसर और उसके आसपास फैले अतिक्रमण का विस्तृत सर्वे दो महीने के भीतर पूरा कर उसकी रिपोर्ट सीधे अदालत में पेश की जाए।
जनहित याचिका के बाद सख्त हुआ कोर्ट
यह आदेश उस जनहित याचिका पर आया है, जिसमें कहा गया था कि अवैध रेहड़ी-पटरी, अव्यवस्थित पार्किंग और स्थायी ढांचों के कारण जामा मस्जिद की ऐतिहासिक पहचान और गरिमा प्रभावित हो रही है। याचिका में यह भी कहा गया कि अतिक्रमण की वजह से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
धार्मिक स्थल की गरिमा और कानून की बराबरी पर जोर
हाई कोर्ट ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल की गरिमा बनाए रखना बेहद जरूरी है, लेकिन सार्वजनिक जमीन पर अतिक्रमण को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि सर्वे और कार्रवाई पूरी तरह निष्पक्ष होनी चाहिए और किसी भी समुदाय को निशाना नहीं बनाया जाए, क्योंकि कानून सभी के लिए समान है।
MCD को सौंपा गया सर्वे और कार्रवाई का जिम्मा
अदालत को बताया गया कि दिल्ली नगर निगम जामा मस्जिद के अंदर और आसपास के पूरे इलाके का सर्वे कराएगा। इस सर्वे के जरिए अवैध कब्जों, रेहड़ी-पटरी, अव्यवस्थित पार्किंग और स्थायी अवैध निर्माणों की पहचान की जाएगी। सर्वे पूरा होने के बाद चरणबद्ध तरीके से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी ताकि ट्रैफिक व्यवस्था सुधरे और श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारु हो सके।
फैज-ए-इलाही मॉडल को दोहराने की तैयारी
यह फैसला पूरी तरह अचानक नहीं माना जा रहा है। इससे पहले फैज-ए-इलाही और तुर्कमान गेट इलाके में नगर निगम की कार्रवाई को सफल बताया गया था, जहां अतिक्रमण हटने के बाद भीड़ कम हुई, ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर हुई और स्थानीय व्यापार को व्यवस्थित स्थान मिला। अब उसी मॉडल को जामा मस्जिद क्षेत्र में लागू करने की तैयारी है।
अंतरराष्ट्रीय विरासत की छवि दांव पर
जामा मस्जिद न सिर्फ दिल्ली बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय पहचान भी है। हर साल यहां लाखों विदेशी पर्यटक आते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अतिक्रमण हटाया जाता है तो जामा मस्जिद की ऐतिहासिक खूबसूरती दोबारा उभरकर सामने आएगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और श्रद्धालुओं को ज्यादा सुकून और सुरक्षा का एहसास होगा।
स्थानीय लोगों में मतभेद, कोर्ट ने संतुलन पर दिया जोर
स्थानीय लोगों की राय इस फैसले को लेकर बंटी हुई है। कुछ लोगों का कहना है कि अतिक्रमण हटने से उनकी रोज़ी-रोटी पर असर पड़ेगा, जबकि कई लोग मानते हैं कि अवैध कब्जों की वजह से क्षेत्र में अव्यवस्था और परेशानियां बढ़ गई थीं। हाई कोर्ट ने इसी संतुलन को बनाए रखने पर जोर देते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की बात कही है।
अब सबकी निगाहें रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर
अब सभी की नजरें अगले दो महीनों में होने वाले सर्वे, कोर्ट में पेश की जाने वाली रिपोर्ट और उसके बाद शुरू होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। सवाल सिर्फ अतिक्रमण हटाने का नहीं है, बल्कि यह भी है कि क्या दिल्ली अपनी ऐतिहासिक धरोहरों को सचमुच संवार पाएगी। फैज-ए-इलाही के बाद अब जामा मस्जिद पर कानून की सीधी नजर है।

