अरावली बचाओ आंदोलन में बुद्धिजीवी, पर्यावरण प्रेमी और नागरिक उतरे सड़कों पर
डिजिटल डेस्क | आंचलिक ख़बरें |
- अरावली बचाओ आंदोलन में बुद्धिजीवी, पर्यावरण प्रेमी और नागरिक उतरे सड़कों पर
- निजी पूंजीपतियों के हित में प्राकृतिक संसाधनों के दोहन का आरोप
- अरावली देश के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच
- मध्यप्रदेश में भी जंगलों की अंधाधुंध कटाई का आरोप
- सरकार से ठोस पर्यावरण नीति और न्यायिक पुनर्विचार की मांग
- बड़ी संख्या में नागरिक रहे उपस्थित
आरोन में देश की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में शामिल अरावली को बचाने के लिए शुक्रवार को आरोन में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। स्थानीय एसबीआई बैंक के सामने पुराने चौराहे पर आयोजित इस प्रदर्शन में बुद्धिजीवियों, पर्यावरण प्रेमियों और आम नागरिकों ने भाग लेकर सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। प्रदर्शन का उद्देश्य अरावली पर्वत श्रृंखला सहित देश के जल-जंगल-जमीन को निजी मुनाफे के हवाले किए जाने का विरोध करना था।
निजी पूंजीपतियों के हित में प्राकृतिक संसाधनों के दोहन का आरोप
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और भाजपा शासित राज्य सरकारें जल, जंगल और जमीन को निजी पूंजीपति घरानों के हित में सौंप रही हैं, जिससे प्राकृतिक संतुलन और पारिस्थितिकी तंत्र को भारी खतरा पैदा हो रहा है। वक्ताओं ने कहा कि यह नीतियां पर्यावरण संरक्षण के बजाय कॉरपोरेट मुनाफे को प्राथमिकता दे रही हैं, जिसका खामियाजा आम जनता और आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।
अरावली देश के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने बताया कि अरावली पर्वत श्रृंखला लगभग 692 किलोमीटर तक गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली में फैली हुई है और यह मरुस्थलीकरण को रोकने वाला देश का सबसे बड़ा प्राकृतिक अवरोधक है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय की पीठ द्वारा दी गई अरावली की नई परिभाषा को विनाशकारी बताते हुए कहा कि इससे जल पुनर्भरण क्षेत्रों, वन्यजीव आवासों और करोड़ों लोगों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
मध्यप्रदेश में भी जंगलों की अंधाधुंध कटाई का आरोप
वक्ताओं ने उदाहरण देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में भी इसी तरह जंगलों की बड़े पैमाने पर कटाई की जा रही है। सिंगरौली, बक्सवाह सहित कई क्षेत्रों में परियोजनाओं, सड़क चौड़ीकरण और उत्खनन के नाम पर हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं, जबकि आम जनता के विरोध को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि प्राकृतिक संसाधनों का यह अंधाधुंध दोहन भविष्य के लिए गंभीर संकट बन सकता है।
सरकार से ठोस पर्यावरण नीति और न्यायिक पुनर्विचार की मांग
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि केंद्र और राज्य सरकारें पर्यावरण संरक्षण को लेकर ठोस नीति बनाएं, न्यायालय अरावली से जुड़े अपने निर्णय पर पुनर्विचार करे और वन क्षेत्रों को कॉरपोरेट हितों में सौंपने की प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए। प्रदर्शन के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने “अरावली बचाओ, पर्यावरण बचाओ” का संकल्प लिया।
बड़ी संख्या में नागरिक रहे उपस्थित
इस विरोध प्रदर्शन में डॉ. एस. सी. गोयल, श्री मुलायम अली, नौरोजी सर, पवन श्रीवास्तव, महेंद्र नायक, राजमल सर, जितेंद्र अहिरवार, शुभम राव सहित बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे और पर्यावरण संरक्षण की लड़ाई को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

