प्रयागराज से लखनऊ तक बढ़ा सियासी तापमान
डिजिटल डेस्क | आंचलिक ख़बरें |
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। इस बार चर्चा के केंद्र में हैं सतुआ बाबा, जिन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का करीबी माना जाता है। प्रयागराज से जुड़ा एक प्रशासनिक विवाद अब लखनऊ तक सियासी संकेत देने लगा है और इसी बीच डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की एक सार्वजनिक नसीहत ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
कौन हैं सतुआ बाबा?
सतुआ बाबा को एक प्रभावशाली धार्मिक व्यक्तित्व के तौर पर देखा जाता है। माना जाता है कि उनके मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से करीबी संबंध हैं। हालांकि सतुआ बाबा किसी भी संवैधानिक पद पर नहीं हैं, लेकिन सत्ता और प्रशासनिक गलियारों में उनकी कथित पहुंच को लेकर पहले भी चर्चाएं होती रही हैं। यही वजह है कि जब उनका नाम प्रशासनिक विवाद से जुड़ा, तो मामला सुर्खियों में आ गया।
प्रयागराज से उठा विवाद
ताजा मामला प्रयागराज से जुड़ा है, जहां जिलाधिकारी को लेकर एक प्रशासनिक मुद्दा सामने आया। इसी प्रकरण पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने सार्वजनिक रूप से नसीहत दी। इस घटनाक्रम के दौरान सतुआ बाबा का नाम सामने आया और यह सवाल उठने लगे कि क्या किसी धार्मिक व्यक्ति का प्रशासनिक फैसलों पर प्रभाव है।
केशव प्रसाद मौर्य की नसीहत क्यों अहम?
केशव प्रसाद मौर्य सिर्फ डिप्टी सीएम ही नहीं, बल्कि प्रयागराज की राजनीति से गहराई से जुड़े नेता भी हैं। ऐसे में उनकी टिप्पणी को महज एक सलाह नहीं, बल्कि सत्ता और प्रशासन के भीतर के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक हलकों में इसे ‘शीतलहर’ कहा जा रहा है—ऊपर से शांति, लेकिन भीतर सुलगती सियासत।
सरकार के लिए क्यों बनी चुनौती
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक बाबा या एक अफसर तक सीमित नहीं है। इससे बड़ा सवाल यह उठता है कि सत्ता में किसका कितना दखल है और प्रशासनिक निर्णयों पर किसका असर पड़ता है। विपक्ष ने इस मुद्दे को तुरंत लपकते हुए सरकार पर आरोप लगाए हैं कि फैसले ब्यूरोक्रेसी नहीं, बल्कि कथित प्रभावशाली लोग तय कर रहे हैं।
योगी सरकार और सख्त प्रशासन की परीक्षा
योगी सरकार अब तक सख्त प्रशासन और जीरो टॉलरेंस नीति की बात करती रही है। ऐसे में सतुआ बाबा का नाम सामने आना सरकार के लिए संवेदनशील स्थिति बन गया है। फिलहाल सरकार की ओर से इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सियासी गलियारों में यह मामला आने वाले दिनों में और गरमाने के संकेत दे रहा है।

