वेनेजुएला पर हमला और भारत को अरबों का फायदा? ONGC से लेकर तेल तक, अंदर की पूरी कहानी

Anchal Sharma
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तेल युद्ध की आंच भारत तक! संकट या सुनहरा मौका—वेनेजुएला कनेक्शन का बड़ा खुलासा

डिजिटल डेस्क | आंचलिक ख़बरें |

ज़रा सोचिए—एक देश पर हमला होता है, दुनिया की सबसे ताक़तवर ताक़त क़ब्ज़े की बात करती है और असर पड़ता है भारत पर। सवाल यही है कि इससे भारत को नुकसान होगा या फिर कहीं अरबों का फायदा छुपा है? चर्चा में है वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई और उसके भारत पर पड़ने वाले वास्तविक प्रभाव।

तेल से भरपूर, फिर भी संकट में वेनेजुएला

वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में से एक है और OPEC (Organization of the Petroleum Exporting Countries) का सदस्य भी। बावजूद इसके, आज वह वैश्विक तेल आपूर्ति में केवल करीब 1 प्रतिशत योगदान दे रहा है। इसकी मुख्य वजह 2019 से लगे अमेरिका के कड़े प्रतिबंध और वेनेजुएला का भारी (Heavy) तेल है, जिसे हर देश रिफाइन नहीं कर पाता।

भारत–वेनेजुएला तेल व्यापार: तब और अब

एक समय था जब 2013 में भारत ने वेनेजुएला से लगभग 13 अरब डॉलर का तेल आयात किया था। लेकिन हालात अब पूरी तरह बदल चुके हैं। वित्त वर्ष 2025 में नवंबर तक भारत ने वेनेजुएला से केवल 25 करोड़ 53 लाख डॉलर का तेल आयात किया, जो कुल आयात का महज़ 0.3 प्रतिशत है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इतनी कम हिस्सेदारी से भारत की ऊर्जा सुरक्षा या अर्थव्यवस्था पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ता।

ट्रंप का दावा और वैश्विक नजरें

अमेरिकी कार्रवाई के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका वेनेजुएला के तेल ढांचे को संभालेगा, उत्पादन बढ़ाएगा और इसमें अरबों डॉलर का निवेश करेगा। इस बयान के बाद पूरी दुनिया की नजरें वेनेजुएला पर टिक गई हैं।

भारत के लिए नुकसान नहीं, संभावित फायदा

असली मोड़ यहीं से आता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात भारत के लिए नुकसानदेह नहीं, बल्कि फायदेमंद हो सकते हैं। भारत की सरकारी कंपनी ONGC Videsh की वेनेजुएला के San Cristobal तेल क्षेत्र में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण करीब 1 अरब डॉलर का पैसा वर्षों से अटका हुआ है। अगर हालात बदले, तो यह राशि भारत को वापस मिल सकती है।

तेल उत्पादन बढ़ाने की योजना

सूत्रों के मुताबिक, ONGC Videsh वहां भारत से रिग भेजकर तेल उत्पादन को मौजूदा 5–10 हजार बैरल प्रतिदिन से बढ़ाकर 80–100 हजार बैरल प्रतिदिन तक ले जाना चाहती है। इसका सीधा लाभ भारत की कंपनियों और ऊर्जा रणनीति को मिल सकता है।

शेयर बाजार और तेल कीमतों पर असर

शेयर बाजार की दृष्टि से विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत पर इसका असर फिलहाल न्यूट्रल रहेगा। हालांकि, अगर लंबे समय में वैश्विक तेल कीमतें कमजोर रहती हैं, तो यह उभरते बाजारों के लिए सकारात्मक संकेत हो सकता है।

भारत की रिफाइनरी ताकत और रणनीतिक बढ़त

भारत की रिफाइनरियां भारी और खट्टा (Heavy & Sour) तेल प्रोसेस करने में माहिर हैं। अगर वेनेजुएला का तेल दोबारा अंतरराष्ट्रीय बाजार में आता है, तो भारत रूस पर अपनी निर्भरता कुछ हद तक कम कर सकता है। यह पहल भारत–अमेरिका व्यापार बातचीत में भी अहम मानी जा रही है।

विशेषज्ञों की चेतावनी

हालांकि, जानकार आगाह करते हैं कि कच्चे माल को लेकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा और संघर्ष बढ़ रहे हैं। ऐसे में भारत को अपने फैसले बेहद सोच-समझकर लेने होंगे, ताकि उसकी रणनीतिक स्वतंत्रता बनी रहे।

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