10 साल की बच्ची से दरिंदगी पर 20 साल की सख्त सजा
डिजिटल डेस्क | आंचलिक ख़बरें |
कभी समोसे खिलाकर बच्चों का दिल जीतने वाला शख्स अंदर से कितना खौफनाक हो सकता है, इसका खुलासा ठाणे की अदालत के एक फैसले ने कर दिया है। महाराष्ट्र के ठाणे की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने 35 वर्षीय आरोपी को 10 साल की मासूम बच्ची से दरिंदगी के मामले में 20 साल की कड़ी सजा सुनाई है।
इलाके का ‘समोसे वाला अंकल’ निकला अपराधी
आरोपी बच्चों को समोसे खिलाता था, उनसे अपनापन जताता था और इसी वजह से इलाके के बच्चे उसे प्यार से ‘समोसे वाला अंकल’ कहते थे। लेकिन इसी भरोसे की आड़ में उसने एक 10 साल की बच्ची के साथ हैवानियत की, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया।
कोर्ट का सख्त संदेश: दया नहीं, सख्ती जरूरी
स्पेशल पॉक्सो कोर्ट की जज रूबी यू. मालवणकर ने 3 जनवरी को फैसला सुनाते हुए कहा कि आरोपी ने बच्चों के विश्वास और मासूमियत को तोड़ा है। अदालत के मुताबिक, ऐसे अपराध समाज की जड़ों को खोखला करते हैं, इसलिए कड़ी सजा जरूरी है ताकि अपराधियों को स्पष्ट संदेश मिले कि कानून किसी को बख्शने वाला नहीं है।
सबसे डरावना सच: आरोपी कोई अजनबी नहीं था
इस मामले का सबसे भयावह पहलू यह है कि आरोपी बच्ची के लिए अनजान नहीं था। बच्ची उसे पहचानती थी, उस पर भरोसा करती थी। यही सच्चाई हर माता-पिता को सोचने पर मजबूर करती है कि खतरा हमेशा बाहर से नहीं आता, कई बार वह पास में ही किसी “अंकल” के रूप में खड़ा होता है।
पॉक्सो कानून और कड़वी हकीकत
देशभर में पॉक्सो कानून के तहत हर साल हजारों मामले दर्ज होते हैं। आंकड़े बताते हैं कि ज्यादातर मामलों में आरोपी पीड़ित का जाना-पहचाना होता है। यानी अपराधी कोई अजनबी नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद चेहरा होता है, जो भरोसे को ही हथियार बनाता है।

